Monday, March 8, 2021

गणतन्त्र दिवस

 26 जनवरी गणतंत्र दिवस 

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 हम सब भारतवासी हैं,  

      भारतीय होने पर हमें गर्व है।


 सब मिल तिरंगा लहराए,

          आज संविधान का पर्व है।


 यह दिन आजादी वाला है,

          संविधान खुशियों वाला है।


 इस दिन के लिए वीरों ने,

                अपना खून बहाया है।


शहीदों का मान बढ़ाने,

               शौर्य का दिन आया है।


 मेरे देश की अलग पहचान है,

        यहां न हिंदू न मुसलमान है।


 मन में देश सेवा का जज्बा,

              हर पल जान कुर्बान है।


 जाति धर्म त्याग सभी,

        लगता भाईचारे का नारा है।


 ईद दिवाली क्रिसमस गुरुपर्व,

         खुशियों का एक पिटारा है।


  विभिन्नता में साम्य है यहां,

        अनेकता में एकता भाव है।


 संस्कृतियों का मेल यहां,

       धर्म आध्यात्म का प्रभाव है।


 इस तिरंगे के रंग निराले

             हर रंग में संदेश भरा है। 


केसरिया साहस का प्रतीक,

         त्याग बलिदान गूढ़ भरा है।


 सत्य शांति प्रतीक रंग सफेद,

         संपन्नता का प्रतीक हरा है।


 मिलकर गौरव चिन्ह बनाते,

         महत्व जीवन ज्ञान समा है।


 तिरंगे मध्य चक्र सुशोभित,

           दिव्य धर्म चक्र दर्शाता है।


24 तीलियां 24 धर्म मार्ग,

         राष्ट्र उन्नति पथ दिखाता है।


 भारतीय तिरंगा गौरव हमारा,

               संघर्ष गाथा बताता है।


ये प्रभुसत्ता का प्रतीक,

            एकता सूत्र में बांधता है।


   " जय हिंद जय भारत "


शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🌹

हिमाचल पूर्ण राजस्व दिवस



आज मेरा हिमाचल पचास वर्ष का हो गया, 


सुदृढ़ समृद्ध उन्नत आत्मनिर्भर  हो गया ।


शिक्षा स्वास्थ्य सामाजिक सेवा में अग्रसर हो गया। 


सच्चे अर्थों में चहुंमुखी तरक्की पा गया। 


आज  के दिन शिमला का रिज मैदान गर्वित हुआ था, 


पूर्ण राज्य की घोषणा पाकर हर्षित हुआ था। 


अठारहवां राज्य बनने का सौभाग्य मिला था। 


महिला प्रधान मंत्री इन्दिरा जी ने एलान किया था। 


कड़ाके की ठंड पर लोगों में नवजोश भरा था। 


हिमाचली नाटी पर हिमाचल निर्माता खूब झूमे थे। 


असंख्य भीड़ जमा थी खुशी में सब गाते झूमें थे। 


इधर भाषण उधर भारी वर्फवारी हो रही थी। 


ध्वजारोहण परेड निरीक्षण की तैयारी हो रही थी। 


हर हिमाचली के हृदय में नव स्फूर्ति भर गई थी। 

🙏जय हिमालय 🙏


मेरा प्यारा हिमाचल मेरे मन में रमा है, 

बर्फीली पहाड़ियों के आँचल में बसा है। 

ऊँचे ऊंचे पर्वत, पहाड़ इसकी शोभा है, 

छोटे बड़े मैदान विखेरते सौम्य आभा है। 

ऊंचाई से गिरते झरने मन को बड़ा लुभाते है। 

बलखाति बहती नदियां प्रगति का  संदेश देती है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

 


    "बेटी करे गर्भ से पुकार"

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बेटी करती अर्ज गर्भ से,

सुन लो मेरी पुकार ......।

जन्म  दो  मुझे  गर्व  से,

देख पाऊं मैं यह संसार।



मैं  भी  ईश का अंश हूं, 

जन्म मरण का  सार। 

यह जग योनि चक्कर, 

अटल सत्य का आधार। 



मैं सृष्टि की सुंदर रचना, 

हर इक युग का उद्धार। 

बिन  मेरे  सब अपूर्ण, 

असत्य और निस्सार। 



मैं  लक्ष्मी, दुर्गा ,काली, 

मैं ज्वाला, धार  तलवार। 

जन पालक पोषण करती, 

दुष्टों  का करती  संहार। 



मैं  होंसलों  की  उड़ान, 

इतिहास की सशक्त नार। 

नक्षत्रों में रहस्य खोजती,

सुर्य चन्द्रमा शक्ति अपार।



मैं उत्पन्ना आदि जगत की, 

हर रिश्ते से जुड़े हैं तार। 

मां,पत्नी, बहन,बेटी,बहू,

निस्वार्थ प्रेम,स्नेह अपार।



 जन्म  मुझे  भी  लेने दो,

 क्यों देते हो कोख में मार।

बेटी बन , बेटा कह लाऊं,

पुण्य समझ, करो उपकार। 



 बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,

न हो तुच्छ सोच, तिरस्कार। 

परम हितेषी मात-पिता की,।

पाकर सदा श्रेष्ठ  संस्कार।



शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

बालिका दिवस पर विशेष

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             "नारी शक्ति"

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"बालिका एवं महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष बढ़ावा देना,

किसी भी राष्ट्र के लिए 

सराहनीय कदम"

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         हमारे देश में 24 जनवरी "राष्ट्रीय बालिका दिवस" के रूप में मनाया जाता है । इस दिवस को मनाने का उद्देश्य बालिकाओं को हर दिशा में जागरूक करना है। बालिकाओं का पोषण अच्छा हो उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा समय व परिस्थितियों के अनुकूल उन्हें कानूनी अधिकारों की जानकारी हो । किसी भी राष्ट्र द्वारा उठाया गया यह कदम अति सराहनीय है कि वह राष्ट्र बालिका एवं महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष बढ़ावा दें , उनके विकास के लिए अवसर प्रदान करें । भारत के प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी द्वारा इस ओर कई योजनाओं को क्रियान्वित किया गया है । वर्ष 2015 में " बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ " का नारा देकर लिंगानुपात में सुधार लाकर महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया गया । लड़का लड़की में भेदभाव व हिंसा को खत्म करना, भ्रूण हत्या को रोकना ,कन्या बाल उत्पीड़न, बाल विवाह, बाल श्रम जैसी कई सामाजिक बुराइयों को दूर करने पर बल दिया गया है । बालिकाओं के हितार्थ सुकन्या समृद्धि योजना ,किशोरी योजना को कार्य रूप देकर उनके भविष्य को सुरक्षित किया गया । कन्याओं के बचाव, सुरक्षा हेतु जागरूकता लाने के लिए हर वर्ष 9 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ सप्ताह" मनाया जाता है । इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार के अलावा कई निजी व सामाजिक संस्थाओं द्वारा अनेक प्रोग्राम किये जाते हैं । विश्व स्तर पर भी बालिकाओं को ज्ञान ,मूल्यों और कौशल के साथ सशक्त बनाने के लिए हर साल 11 अक्टूबर को "अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस " मनाया जाता है । भारत में 2008 से इस अभियान को( राष्ट्रीय बालिका दिवस )  कार्य रूप दिया गया ,

तदनंतर लोगों की मानसिकता पर कुछ फर्क पड़ा है लेकिन अभी भी पूरी तरह से इस बुराई से निजात नहीं मिली है । दुख तब ज्यादा होता है जब शिक्षित वर्ग भी लिंग जांच करवाने के चक्कर में पड़े होते हैं क्योंकि समाज में कुछ ऐसी घटिया सोच का वर्ग भी है ,जिन्हें बेटा चाहिए ,भले ही वह बेटा बुढ़ापे में उनकी देखभाल भी न  करें , बस वंश चलना चाहिए

। लोगों की इसी सोच को बदलना होगा। आज क्या बेटियां बेटों से कम है ? आज हर क्षेत्र में बेटियां बेटों से आगे है ,सबल है ,सक्षम है । बेटियां राष्ट्र का भविष्य है, गौरव है । हर कामयाब एवं सशक्त बेटी मां बाप का गर्व है। अतः बेटी को जागरूक सशक्त एवं बलवती बनाने हेतु मां-बाप ,समाज, राष्ट्र को विशेष भूमिका निभाने का वक्त आ गया है ।


'सदियों से झेला जिस पीड़ा को, जड़ से आज  उसे मिटाना है।

पंख लगाकर खुले आसमान में, उड़ कर अंतर्मन को जगाना है।'


शीला सिंह

 बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

मैं पढ़ने जाऊ़ंगी

 'बाल कविता'  ------------------ मां मैं भी पढ़ने पाठशाला जाऊंगी ज्ञान पा मैं पढ़ी-लिखी कहलाउंगी घर का सारा काम भी  मैं  करूंगी अच्छ...