Monday, March 8, 2021

बालिका दिवस पर विशेष

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             "नारी शक्ति"

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"बालिका एवं महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष बढ़ावा देना,

किसी भी राष्ट्र के लिए 

सराहनीय कदम"

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         हमारे देश में 24 जनवरी "राष्ट्रीय बालिका दिवस" के रूप में मनाया जाता है । इस दिवस को मनाने का उद्देश्य बालिकाओं को हर दिशा में जागरूक करना है। बालिकाओं का पोषण अच्छा हो उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा समय व परिस्थितियों के अनुकूल उन्हें कानूनी अधिकारों की जानकारी हो । किसी भी राष्ट्र द्वारा उठाया गया यह कदम अति सराहनीय है कि वह राष्ट्र बालिका एवं महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष बढ़ावा दें , उनके विकास के लिए अवसर प्रदान करें । भारत के प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी द्वारा इस ओर कई योजनाओं को क्रियान्वित किया गया है । वर्ष 2015 में " बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ " का नारा देकर लिंगानुपात में सुधार लाकर महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया गया । लड़का लड़की में भेदभाव व हिंसा को खत्म करना, भ्रूण हत्या को रोकना ,कन्या बाल उत्पीड़न, बाल विवाह, बाल श्रम जैसी कई सामाजिक बुराइयों को दूर करने पर बल दिया गया है । बालिकाओं के हितार्थ सुकन्या समृद्धि योजना ,किशोरी योजना को कार्य रूप देकर उनके भविष्य को सुरक्षित किया गया । कन्याओं के बचाव, सुरक्षा हेतु जागरूकता लाने के लिए हर वर्ष 9 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ सप्ताह" मनाया जाता है । इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार के अलावा कई निजी व सामाजिक संस्थाओं द्वारा अनेक प्रोग्राम किये जाते हैं । विश्व स्तर पर भी बालिकाओं को ज्ञान ,मूल्यों और कौशल के साथ सशक्त बनाने के लिए हर साल 11 अक्टूबर को "अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस " मनाया जाता है । भारत में 2008 से इस अभियान को( राष्ट्रीय बालिका दिवस )  कार्य रूप दिया गया ,

तदनंतर लोगों की मानसिकता पर कुछ फर्क पड़ा है लेकिन अभी भी पूरी तरह से इस बुराई से निजात नहीं मिली है । दुख तब ज्यादा होता है जब शिक्षित वर्ग भी लिंग जांच करवाने के चक्कर में पड़े होते हैं क्योंकि समाज में कुछ ऐसी घटिया सोच का वर्ग भी है ,जिन्हें बेटा चाहिए ,भले ही वह बेटा बुढ़ापे में उनकी देखभाल भी न  करें , बस वंश चलना चाहिए

। लोगों की इसी सोच को बदलना होगा। आज क्या बेटियां बेटों से कम है ? आज हर क्षेत्र में बेटियां बेटों से आगे है ,सबल है ,सक्षम है । बेटियां राष्ट्र का भविष्य है, गौरव है । हर कामयाब एवं सशक्त बेटी मां बाप का गर्व है। अतः बेटी को जागरूक सशक्त एवं बलवती बनाने हेतु मां-बाप ,समाज, राष्ट्र को विशेष भूमिका निभाने का वक्त आ गया है ।


'सदियों से झेला जिस पीड़ा को, जड़ से आज  उसे मिटाना है।

पंख लगाकर खुले आसमान में, उड़ कर अंतर्मन को जगाना है।'


शीला सिंह

 बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

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