"चंदा मामा"
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चंदा मामा ठंड में क्यों विचरते हो
क्या तुम सर्दी से नहीं डरते हो?
ठंड लगेगी तो बिमार पड़ जाओगे
अपनी मम्मी से फिर डांट खाओगे
हर रोज घूमते हो उन्मुक्त गगन में
बादलों के बीच तारों के संग में
कभी छुपते ,कभी चमकते पल में
कभी भीगते नहाते वर्षा के जल में
कभी तो ले लेते आकार विशाल
सुन्दर इतने ,गोल चांदी का थाल
सिकुड़ते, फैलते, कैसा मायाजाल
सदियां बीती, बीते असंख्य साल।
जबसो जाऊं तब गगन में आते हो
प्रातः होते ही कहां चले जाते हो?
पास नहीं आते मामा कहलाते हो
आंख मिचौली खेल,खेल जाते हो
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
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