'किसान दिवस पर विशेष
----------------------------------
क्यों भटक रहा देश का किसान,
आज सड़कों पर ये क्या हो रहा?
मिट्टी को बनाया है जिसने सोना, मां भारती का लाल क्यों रो रहा?
कितनी पीड़ा से आहत है बेबस, सब कुछ आज वह झेल रहा।
क्यों और कैसे बनकर बेदर्द कोई, उस की भावनाओं से यूं खेल रहा।
मेहनत से प्रीत लगाई, मेहनत ही उसका सच्चा मंहगा गहना रहा है।
कर्मठ,बलिष्ठ सदा लक्ष्य रहा पर
केवल कष्ट को सहता ही रहा है।
बारह मास परिश्रम करता है डट कर खूब वह अनाज उगाता है ,
फिर क्यों आज बैठ चौराहे पर वह तपि दुःख ही दुःख पाता है ।
कभी बाढ़ ,कभी सूखा हर त्रासदी निज तन पर दुर्गति को पेल रहा।
समय बीता सदियां बीती, नियति का भी चलता यहां यही खेल रहा।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
No comments:
Post a Comment