कुछ न पाकर भी,
थी वह स्वामिनी।
कौरव पांडव के
हृदय की सम्राज्ञी।
मगर पति प्यार
से वंचित , ग्रसित।
जामाता कृत्यों से
भी लज्जित बनी।
हस्तिनापुर कीशक्ति
वो साहसी नारी।
जीवन कथा संघर्षों में
पीड़ा झेली भारी।
देव आह्वान मंत्र
दुर्वासा ऋषि से पाया।
रति आसक्ति बंचित
पर ममत्व पूर्ण पाया।
माता-पिता का दुलार
मिल न पाया प्यार।
कुंती भोज की गोद
आंगन की कली बनी।
कौमार्यावस्था में सूर्य देव
का वरदान पा गई ।
विवाहपूर्व कुन्ती
अप्रकट मां कहला गई।
तीन निज दो सौत के
पांच वत्ससुता कहला गई।
प्रथम आत्मज पर
चिर रहस्य छा गई।
सदैव उपेक्षित कर्ण
ममता छांव से दूर ।
सूतपुत्र कहलाया
अपमान सहा भरपूर।
माता कुंती लोकलाज
की करती रही रखवाली।
निज वत्स से आत्मजों
की प्राण रक्षण हितशाली।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏
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