2020 तुम कितने निष्ठुर बने रहे
अपनो में शामिल बेगाने बने रहे।
चिन्ता पीड़ा देकर इतराते ही रहे
धीमी धीमी चाल गम बरसाते रहे।
क्या मानव के पाप कर्म का फल
या धर्म विमुखता का परिणाम था
कैसा ये भयंकर ज्वार सैलाबी
या विनाशी आंधी तूफान चक्र था।
कामगारों के रोजगार भी छूट गये
बच्चों की छूटी नियमित पढाई
दरवाजे के भीतर थे कैद सभी
जीव हर पल मांगे मौत से रिहाई।
मंहगाई शीर्ष पर चौपट सारे धंधे
सड़क पर मजदूर भूखे प्यासे नंगे
महामारी से त्रस्त, पुलिस के डंडे
दारून वक्त,न जाने नकली फंडे।
सीमा प्रहरी सेवापथ पर न्योछावर
आपदा झेले हर भारती बन कातर
काल चला असंख्य ग्रास बनाकर
विध्वंस,दूषित हवा, भू पर आकर
वर्ष अन्त में दुविधा बड़ी दुखारी
इक महामारी दूजे आन्दोलनकारी
अनशन पर बैठा जग हितकारी
देश अन्नदाता चिरकाल उपकारी।
अब आने वाले वर्ष की प्रतीक्षा है
खुशियां बरसे चहंओर कामना है
खट्टे तीखे पलों को भी भुलाना है
हर मन में खुशी के दीप जगाना है
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शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
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