यज्ञ कुंड से जन्मी वो यज्ञसेनी थी
महाभारत नायिका वो द्रोपती थी
पूर्वजन्म मुद्गल ऋषि की पत्नि थी
फिर द्रुपद पुत्री ,वो अग्निसुता थी।
अल्पायु पतिप्राण तजे ब्यथित हुई
शिव घोर स्तुति शुभवर हेतु हीभई
पाँच गुण सम्पन पति वरदानी हुई
कथन पंचम दोहराया वो चूक हुई
स्वयंवर में जीता अर्जुन ने उसको
मांआशीश ने पांचो में बांटाउसको
अर्जुन ने हृदयप्रेयसी माना उसको
निज धर्म कर्म सत्य भान जिसको
इक इक कर जब सब जुए में हारे
दांव पर बलि बेबसपतियों के मारे
क्या कुछ न सहा हर हृदय कांपा,
मान मर्यादा टूटी,बंधन नियम सारे
भरी सभा में चीरहरण हुआउसका
सभी कुटुम्बी,कोईसहाई न उसका
कर जोड़ इज्ज़त की भीख मांगी
बेहयाई पर जोर न चला उसका।
आये प्रभु लाज बचाने द्रौपदी की
वो सखी जिसे मानते, द्रौपदी थी
अन्तहीन वस्त्रछोर दुशासन हारा
कुल विनाशी प्रारम्भ की घड़ी थी।
यज्ञ कुंड कन्या घोर श्राप दे गई
अंही कौरवकुल विध्वंस कर गई
नारी मान भंग दुःसाहस जो करे
वो महाभारत की रचना कर गई।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏
No comments:
Post a Comment