हे आने वाले वर्ष
उम्मीदों के फूल खिलाना।
बीते वर्ष जो घाव
लगे मरहम जरूर लगाना।
गम के साये में जिये
अब खुशियां बरसाना।
जिस पीड़ा को झेला
वो स्मरण न कराना।
कैसे रूकेंगे उस मां के अश्रु,
लाल वतन पर कुर्वान।
अपाहिज हुआ बढ़ापा,
तन कंकलऔर बेजान।
बहन की राखी राह
ताकेगी दिन और रात।
बौराई कुल नवयौवना
जिसका छूटा जीवन साथ।
संकट में हर प्राण,कोरोना
प्रकटा जब झपटमार।
लील गया कई जीवन
करके भयंकर वार।
समय की टेढ़ी चाल
से जीना हो गया दुश्वार।
टूट गया संग अपनों का
और छूट गया परिवार ।
हे ईश, सृष्टि नियामक,
जग के पालनहार ।
नववर्ष बने मंगलकारी
एसा वरदान दे देना।
उदास नीरस नैनों में
हर्ष किरण फैला देना।
सहारे जिनके छूट गये
अवलंब बन जाना।
उल्लास हों चहुंओर ब्रह्मांड
आलोक कर जाना।
काली तम निशा बाद अब
आमोद किरण फैला जाना।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏
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