Wednesday, January 6, 2021

श्री राम की नीतियां

 'श्रीराम की संघात्मक, संगठनात्मक और व्यवस्थापक नीति '

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 श्री 'राम ' चंद्र जी वन यात्रा में जन जन की सद्भावना को जीतते हुए उन्हें  सूत्र में बांधते हुए चलते हैं ,उनमें सहयोग वृत्ति जागृत करते चलते हैं


 ।  भगवान राम सहयोग देने और प्राप्त करने में कुशल है। वे प्रेम भावना ,उच्चस्तरीय संवेदना के आधार पर जन भावना को सूत्रबंद करते हैं । 

 ऋषि बनचर के अतिरिक्त गीध राज को भी अपना सहयोगी बना लेते हैं  ।

इसी सहयोग भाव तथा संवेदना जनक सामाजिक दृष्टिकोण में ही गिधराज जटायु को शहीदों में अग्रणी बना दिया । 


श्री राम को सीता के संबंध में पहले जानकारी उसी से मिली । 

श्री राम की सहयोग और संगठन वृत्ति ही सफलता के द्वार खुद ही खुलते चले गए  । 

रीछ वानरों को संगठित करके वह सीताजी जी की खोज करने और असुरों के विरुद्ध वातावरण तैयार करने में समर्थ हुए ।


 उनके संगठन में भांति भांति के वानर सम्मिलित थे  ।जहां सामूहिकता और संगठन की शक्ति है वहां बड़े से बड़े काम आसानी से हो जाते हैं ।


वानर संख्या में अधिक नहीं थे अपितु  उनमें सामूहिकता की वृत्ति तथा अनीति के प्रतिरोध के सामाजिक उत्तरदायित्व की बुद्धि भी प्रखरता से जाग चुकी थी , इसलिए समुद्र पर पुल बनाने जैसा कठिन कार्य भी उन्होंने आसानी से कर दिया ।


 रीछ वानराें की संघ शक्ति और सहयोग वृत्ति अद्भुत थी  ।सामूहिक सहयोग के बल पर राक्षसों का विनाश हुआ ।


 भगवान राम ने भरत के लिए भी यही संदेश छोड़ा था कि सामूहिक हित और सहयोग को ध्यान में रखकर चलें  ।गुरु वशिष्ट से भी यही आग्रह करते हैं।


  वन में रहते हुए वनवासियों के प्रति भी 'श्री राम ' प्रेम का भाव भरते हैं जब कोल भील मिलते हैं तो वह उन सब को सम्मान देते हैं और सामाजिक गौरव का बोध कराते हैं ।


 श्री 'राम ' कहते हैं कि व्यवस्थात्मक उत्तरदायित्व जिस किसी पर भी हो उसे सामूहिकता की मर्यादा अवश्य बनाकर रखनी चाहिए ।उससे परस्पर  स्नेह भाव भी बढ़ता है तथा अपेक्षाकृत अधिक उपयोगी हल भी निकाले जा सकते हैं ।

 व्यवस्थापक ही नहीं सामान्य नागरिक तथा कार्यकर्ता भी यदि सामूहिकता का लाभ उठाने के अभ्यस्त हो तो विषम परिस्थितियों में भी मार्ग निकाल लेते हैं ।

  रामचरितमानस से सामाजिक दृष्टिकोण, सहयोग और संगठन की महत्ता समझकर प्रेरणा लेकर यदि हम इस दिशा में सक्रिय हो सके तो कठिन से कठिन बाधाओं को पार करते हुए सुख शांति एवं समृद्धि युक्त आदर्श समाज की स्थापना करने में सफल हो सकते हैं ।


'जय श्री राम' ।

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