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मां मैं भी पढ़ने पाठशाला जाऊंगी
ज्ञान पा मैं पढ़ी-लिखी कहलाउंगी
घर का सारा काम भी मैं करूंगी
अच्छा वस्त्रभोजन जिद्द न करूंगी
मिट्टी गारा इन हाथों से हटा दो मां
कॉपी पेंसिल इनमें तो थमा दो मां
मुन्ना मुन्नी संग मैं रोज खेलती हूं
पढ़ने की इच्छा मन में पालती हूं
कखग एबीसी अक्षर ज्ञान पाऊं मैं
पढ़ना लिखना एक उदेश्य चाहूं मैं
जो बच्चे अच्छे पढ़ लिख जाते हैं
मेहनत के बल कुछ कर पाते हैं।
जग इतिहास में भी जाने जाते हैं
अपने देश का गौरव वो बढ़ाते हैं।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏
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