उलझाओ तो उलझ जातीज़िन्दगी
सुलझाओ तो सुलझ जातीजिंदगी
मन के भावों से बंधा है हर कोना
बदलो तो बदल भी जाती जिंदगी
कांटों की सेज मुश्किल है सोना
संवारो तो संवर भी जाती जिंदगी
मन की तड़पन में हृदय का रोना
खुशी केआंसूभी बनजाती जिंदगी
खिलते फूल महक जीवन में होना
'शील' का श्रृंगार बन जाती जिंदगी।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश
No comments:
Post a Comment