धरती मां का साधक किसान है
कर्मठता उसकी साधना विधान है
भोर अप्रकटे खेतों में पहुंच जाता
रवि रश्मि सर्वपूर्व कार्य लग जाता
मनचौकन्ना तन बेसुधि लक्ष्य पाने
रैनदिवस इकसार हो कृषकी जाने
ऋतु सदृश हर अन्न उगाया उसने
धूप बर्षा गर्मी सहन किया उसने
हर दर्द सहा हर पीड़ा ले ली उसने
सूखा बाढ़ सब विपदा झेली उसने
कर्ज चढ़ा सिर घाटा फसल पाया
वर्षों वर्ष बीते फिर उभर न पाया
हाथ जोड़ अर्ज कर व्यथा सुनाता
करे पुकार सड़कों पर आ उतरता
क्यों इतना अन्याय मुझसे हो रहा
कर्मयोगी बन कर भी क्यों रो रहा
क्याअन्नदाता का अपमान नहीं है
क्या इसका कोई समाधान नहीं है
उसका सम्मान बना रखना होगा
धरती साधक है मान रखना होगा।
जय जवान जय किसान
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
No comments:
Post a Comment