Monday, December 7, 2020

मां गंगा


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हिंदू धर्म में देवी रूप है गंगा 

धर्म जाति देश श्रृंगार है गंगा 

हरजन मुक्ति का द्वार है गंगा

संस्कृति का संस्कार  है गंगा।


पावन नीर, सबका उद्धार करे 

बंजर धरा में ये हरियाली भरे 

खेत खलिहान शस्य,धान्य भरे 

उपवन उपवन पुष्प हररंग भरे।


जननी जग निर्मल करती आई 

पोषित कर देवी रूप कहलाई 

आनादि अविरल धारा बहाई 

सभ्यता संस्कृति प्रतीक कहाई। 


पर क्यों इस मानव में समझ नहीं 

दूषित शुचि नीर अब दूषित मही 

उद्गम था वृहत क्यों सिकुड़ चली 

संवारे जन जीवन जो मुड़ चली। 


हिन्द बांधव प्रण एक है निभाना

रिसती सत्ता को होगा ही बचाना

बहती रहे सदा शुद्ध धारा निरत 

मन मन में भाव अवश्य जगाना ।


शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏

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