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पक्के इरादों की उड़ान मैं भरती हूं
कंटीले रास्तों पर सदा मैं चलती हूं
चलफिर न सकूं पर अक्षम नहीं हूं
हूं तन से दिव्यांग पर मनसे नहीं हूं
मैं पवन वेग, रजकण संग चली हूं
कांति पाने धूल मिट्टी सभी सनी हूं
आँधी तूफानों से मैं लड़ती रही हूं
हूं तन से दिव्यांग पर मनसे नहीं हूं
बन नदी धारा चट्टानों से टकराई हूं
निज मार्ग में गति ही मोड़ लाई हूं
लघु दीर्घ पड़ाव रुक ठहर पली हूं
हूं तन से दिव्यांग पर मनसे नहीं हूं
धरा से शील चंन्द्र शीतलता पाई हूं
नक्षत्रों से जीवन में कांति लाई हूं
श्रम, ज्ञान सफलता संतुष्टि पाई हूं
हूं तन से दिव्यांग पर मनसे नहीं हूं
विधि -मानव के मध्य की कड़ी हूं
वक्त को चुनौती मैं अमोल घड़ी हूं
हैं पाँव नहीं पर मैं पाँव पर खड़ी हूं
हूं तन से दिव्यांग पर मनसे नहीं हूं
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏
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