जीवन में सादगी का नहीं कोई मोल,
न कोई तराजू और न होता कोई तोल।
विचारों में बड़प्पन ज्यों नभ समान,
लक्ष्य, संकल्प संतोष धन ही सम्मान।
कार्य प्रवीणता और परोपकार की भावना,
सकारात्मक सोच और कल्याण की भावना।
संग्रह /संचय से दूर, खुशियों का जोड़,
न बैर न क्रोध ,न ही ईर्ष्या की है
दौड़।
सादगी ,सच सहज ,ईश्वर का रूप है ।
सादगी से ही सौंदर्य, सुख का प्रारूप है।
सादगी से हर उपलब्धि और मान है,
सफल, सार्थक जीवन की पहचान है।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏
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