ईंट गारे का मिश्रण नहीं ये घरौंदा
भावनाओं का मसाला लगा है ,
पाई पाई का हिसाब देता ये घरौंदा
पसीने की खारी बूंदों से सजा है ।
कोने कोने में चमक मेहनत की
हर उपवन का पुष्प खिला है ,
प्यार दुलार आदर का है संगम
रिश्तों को सलीके से सिला है ।
प्रेम प्रतीति का बंधन दिलों में
कोई शिकवा न कोई गिला है ,
स्वर्ग कहाँ?कोई नहीं है जानता,
धरती पर ही स्वर्ग मिला है ।
कुटुंब माला हीरे मोतियों है गूंधी
हृदय मेंशुद्ध प्रेम ज्योति जगती है,
बड़ों की सीख नित राह दिखाती
बुजर्गों की आशीश फलती है ।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏
No comments:
Post a Comment