Tuesday, December 15, 2020

घरौंदा


           


ईंट गारे का मिश्रण नहीं ये घरौंदा 

भावनाओं  का  मसाला  लगा है ,

पाई पाई का हिसाब देता ये घरौंदा 

पसीने की खारी बूंदों से सजा है ।


कोने कोने में चमक मेहनत की 

हर  उपवन का पुष्प खिला  है ,

प्यार दुलार आदर का है संगम 

रिश्तों को  सलीके से सिला है ।


प्रेम  प्रतीति का बंधन दिलों  में 

कोई शिकवा न  कोई गिला  है ,

स्वर्ग कहाँ?कोई नहीं है जानता,

धरती  पर  ही  स्वर्ग मिला है ।


कुटुंब माला हीरे मोतियों है गूंधी

हृदय मेंशुद्ध प्रेम ज्योति जगती है,

बड़ों की सीख नित राह दिखाती 

बुजर्गों  की आशीश  फलती  है ।


शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏

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