Wednesday, November 18, 2020

दीपावली -'दीपाें की अवली '

 

----------------------------------दीपों की अवली जगे ऐसे 

जग सारा रोशन हो जाए।


 कार्तिक अमां काली रात

 ज्योत प्रभा से नहा जाए।


 भर उल्लास  खुशी मनाएं

 शुभबेला मंगल गीत गाएं।


 सन्यासी सीताराम कोप से 

आज अयोध्या वापस आए


राम आराध्या माना सभी ने

वाे आदर्श माना किसी ने ?


 वर्षों पूजे राम दिखावा है?

चरित्र धारे नहीं छलावा है।


घरघर सीतागुण जाते गाये

लज्जित करते न संकुचाये


 अहिल्या बनी पत्थर मूरत

 कोई राम बन क्यों न आए


 शबरी जैसी भक्ति है कहां 

 मंदिर में ढोंगी ही अलसाए


 केवट जैसा सेवक न अब

 चपल स्वार्थी दांव लगाएं।


 राम  जैसा  वाे पुत्र  कहां 

 क्यों वृद्धाश्रम भरते जाएं?


लक्ष्मण जैसा भाई न मिले

घृणा के बन गए ऊंचे टीले।


 कुत्सित मन कब बदलेंगे?

 पाप छोड़ सन्मार्ग चलेंगे?


 हे 'राम 'शीघ्र लौट आओ

 आंसू दीनाें के पाैंछ जाओ


 अयोध्या फिर  बसाने को

 'तम'मन जोत जगाने को।


 शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

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