कविता
चलो इस दिवाली
एक नियम अपनाएं।
अंधेरा जहां दिखे
दीप वहां भी जलाएं ।
कुटिया में बेबस पड़े
किसी दीन को सहलाएं।
पहले टुकड़े मिठाई से
उसका मुंह मीठा करायें।
कई दिनों से भूखा था
जो कुछ खाना दे आएं ।
नीरस सूखी आंखों मेंं
झलक खुशी भर आएं ।
अपना समझ कर उसे
अपनापन दिखा आएं।
अपने घर भी दिवाली
कुछ लौ उसे भी दे आएं।
मांने प्रभु का रूप उसे
आशीष अनोखी पाएं ।
खुशियां भर के झोली
चलो खुशियां मनाएं।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
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