Wednesday, November 18, 2020

दिवाली -'चलाे खुशियां मनाएं'

 कविता


चलो इस दिवाली 

एक नियम अपनाएं।


अंधेरा जहां दिखे 

दीप वहां भी जलाएं ।


कुटिया में बेबस पड़े 

किसी दीन को सहलाएं।


पहले टुकड़े मिठाई से

उसका मुंह मीठा करायें। 


कई दिनों से भूखा था

जो कुछ खाना दे आएं ।


नीरस सूखी आंखों मेंं

झलक खुशी भर आएं ।


 अपना समझ कर उसे

 अपनापन दिखा आएं।


अपने घर भी दिवाली

कुछ लौ उसे भी दे आएं।


मांने प्रभु का रूप उसे

आशीष अनोखी पाएं ।


 खुशियां भर के झोली

 चलो खुशियां मनाएं।


शीला सिंह 

 बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

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