Wednesday, November 18, 2020

'राष्ट्रीय पक्षी दिवस पर'

 

मेरी कविता 12.11.2020

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देख  क्रंदन तेरा, मन आहत मेरा

ऊंची डाल नीड़ में,रहे बना बसेरा


तिनका तिनका जोड़, चोंचमें दबा 

रहता चिन्तनशील,ईक पल न गवा


बना घर सफल हुई सोची तरकीब 

संध्या ढलते विश्राम करते दो जीव

इक चुगता दाना दूजा अंडे सेता है 

सुखी बने गृहस्थी ,वो प्रण लेता है

इक भोर किरण दिनकर ने फैलाई

मधुर ध्वनि चींचीं चिंचीं दी सुनाई


छत पे बैठा था कागा घूर रहा था 

कब झपटूं  शिकार ताक रहा था 


कुछ पल देखा डगमगा गई डाली 

खा गया चूजे नीड़ रह गया खाली 


संध्या वेला दोनों पक्षी दौड़े आए

खाली देख नीड़ को भागे बौराए


विलाप करते दोनों अंबर गूंज उठा

ऐसा क्रंदन पीड़ा कि मन रो पड़ा।   


शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏

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