Wednesday, November 18, 2020

गोवर्धन पूजा अन्नकूट त्यौहार

 


'गोवर्धन पूजा अन्नकूट त्यौहार'


कार्तिक मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा है आती,

प्राचीन हिंदू परंपरा गोवर्धन पूजा शोभा पाती।


प्रात तन तेल मालिश स्नान की परंपरा है,

विधि पूजन से कुलदेवता की अर्चना है।


कृष्ण भक्त मन में श्रद्धा भाव जगाते हैं,

विश्राम मुद्रा में पुरुष आकृति बनाते हैं।


सुरभि गौबछ से सुंदर गोवर्धन अचला,

योगेश्वर श्री कृष्ण प्रभु की मूरत सजाते हैं।



नाभि मध्य माटी का दीपक शोभा पाता,

दूध ,दही ,गंगाजल ,शहद और बताशा,


फूल,दूब ,पत्ते,डाली सजाकर

पूजा करते,

गोधन रहे रक्षित बृजवासी प्रार्थना है करते ।



गोवर्धन पूजा अति उत्तम और संस्कारी है,

धेनु पूजन पुष्पमाल सींग सिंदूरी शुभकारी है।

कथा कहें -अति दिव्य दिवस की चमत्कारी है,

जय जय श्री कृष्णा जो प्रभु विष्णु अवतारी है।



एक समय की बात, कृष्ण ग्वालों के साथ,

गोवर्धन पर्वत पर जाते ,गायों को चराते।

उत्सव मनाते बृजवासी ,इंद्र पानी बरसाते ,

भक्ति पाकर इंद्र ,झूठे घमंड में डूब जाते ।

मेरे जैसा बलवान न कोई दंभ अंह भर पाते

गोवर्धन पर्वत अलौकिक, दिव्य धाम,

पूजा हो प्रथम कृष्ण यही महत्ता बताते।

इंद्र दंभ शक्ति में चूर मेघ बरसाए भरपूर,

सप्त दिवस निरत सभी प्राण रक्षा आतुर।

गोप ग्वाले पशुधन समेत पानी तरने लगे,

जल में भरे हिचकोले हाहाकार करने लगे।

तब श्री कृष्ण प्रभु ले अवतार हुए प्रकट,

गोवर्धन उठाया कनिष्का अंगुली पर तुरंत।

सत्य जानकर इंद्र करे बारबार याचना, 

श्री कृष्ण तो विष्णु के अवतार सब ने माना।

खुश हुए और झूम उठे ब्रजवासी सभी,

गोवर्धन पूजा अन्नकूट पर्व परंपरा बनी तभी।



 शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश

( मेरी हर रचना मौलिक और स्वरचित होती है)🙏

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