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दिवाली खुशियों का त्योहार
सुख वैभव समृद्धि का सार।
दीप जगा खुशियां पायें अपार
आलोकित हो मन भीतर बाहर।
चलो जरा उस कुटिया तक जायें
क्यों पसरा अंध सन्नाटा देख आए
अपने घर को हमने रोशन किया
दीपक वहां भी जगा कर आए।
मिठाई पकवान जो घर में बने हैं
मुंह उनका भी मीठा करा आए।
भूख गरीबी की मार जो झेल रहे
दुखड़ा उनका भी कुछ कम आएं।
एक टक निहारे सूखी नीरस आंखें
उनमें आस मनोहारी भरके आए ।
सीमा का प्रहरी शहीद जो हुआथा
उस मां के दिल सांत्वना दे आए ।
छूटा जिसका बुढ़ापे का सहारा
उस पिता का दुख कम कर आएं।
सब मिल मनाए खुशी दिवाली
न बेगानी ये दिवालीअपनो वाली।
आशीष दें खुशियां लाएं दिवाली
झोली रहे न किसी की खाली ।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
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