'क्यों रात भर नींद नहीं आती/ नींद का गणित'
------- भरपूर
नींद हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। दिन भर की थकान के बाद हर व्यक्ति यही चाहता है कि उसे अच्छी और भरपूर नींद आए। डॉक्टर के अनुसार रात में 7, 8 घंटे नींद अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है । लेकिन जब सोने पर भी नींद ही ना आए तो एक गंभीर समस्या की ओर इशारा माना जाना चाहिए। अनिन्द्रा पर अवश्य ध्यान देना चाहिए । इस बीमारी को अंग्रेजी में इनसोम्निया(Insomnia) कहा जाता है जिसके दो रूप है ,1. एक्यूट इनसोम्निया- यहअनिन्द्रा
का एक प्रकार है, यह समस्या कुछ दिनों या हफ्तों के लिए हो सकती है और उसके बाद सामान्य भी हो सकती है। काम का दबाव कोई पारिवारिक चिंता , कोई घटना या अन्य कोई परिवारिक समस्या अनिन्द्रा का कारण बनती है । 2. क्रॉनिक इनसोम्निया - अनिद्रा की समस्या गंभीर हो सकती है क्योंकि यह समस्या महीने भर या इससे भी ज्यादा दिनों तक हो सकती है ।ये एक प्रकार के नींद संबंधी विकार है इसमें व्यक्ति को सोने में असुविधा नींद की कमी या नींद पूरी ना हो पाने की समस्या रहती है और ऐसा होने पर स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है अनेकों समस्याएं पैदा हो जाती है ।नींद में कमी कई तरह की परेशानियां पैदा कर सकती है - एकाग्रता में कमी, याददाश्त कम होना, आंखों के नीचे काले घेरे, पेट की गड़बड़ी, उल्टी ,चिड़चिड़ापन आदि समस्याएं हो सकती हैं। नींद ना आने के कई कारण हो सकते हैं,जैसे- चिंता और मानसिक अवसाद नींद ना आने की एक बहुत बड़ी वजह है। डिप्रैशन और नकारात्मक सोच के कारण भी कई बार नींद नहीं आती मानसिक और भावनात्मक असुरक्षा भी अनिद्रा की एक बड़ी वजह बनती है । कोई शारीरिक पीड़ा , दर्द हो तब भी अच्छी नींद में बाधा बनता है । ज्यादा मात्रा में और कई बार चाय कॉफी पीने से भी नींद कम आती है क्योंकि कैफीन को तो नींद का दुश्मन समझा जाता है। कुछ लोगों को ज्यादा रोशनी में सोने की आदत नहीं होती, ज्यादा रोशनी उनकी निंद्रा में बाधक बनती है। देर रात तक टीवी देखते रहना, और इंटरनेट से जुड़े रहना भी सोने का रूटीन बिगाड़ देता है । अल्कोहल का सेवन करना, शराब सिगरेट पीना ,अत्यधिक नशा करना और नशा न मिलने की वजह से भी नींद नहीं आती है। कुछ लोग हमेशा चिड़चिड़ा स्वभाव के रहते हैं उदासीनता ऐसे लोगों को घेरे रखती है ऐसे लोगों को भी अनिन्द्रा की बीमारी होती है। इस प्रकार अनेको ऐसे उदाहरण हैं जो अनिद्रा का कारण बनते हैं। इसके लिए अपनी जीवनशैली में सुधार लाना आवश्यक है,अपनी आदतों को बदलना जरूरी है। चिंता और मानसिक अवसाद को अपने से दूर रख कर अच्छी नींद का आनंद लिया जा सकता है। समय पर सोने और जागने की आदत डालनी चाहिए। हम सोते समय किसी समस्या को लेकर चिंता में न रहें । किसी प्रकार का शारीरिक दर्द या पीड़ा है तो समय रहते उसका इलाज कराएं।
सदा अच्छा सोचे और सकारात्मक सोच बनाए रखें बुरी आदतों को अपने जीवन में न आने दे। लोभ ,लालच ,ईर्ष्या ,घृणा ,प्रतिशोध हिंसा जैसे दुर्गुणों को त्याग कर सदैव कर्मशील बनते हुए अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए । शुद्ध विचारों को आत्मसात करते हुए परोपकारी भावना को अपनाया जाए तो जीवन सुखमय बनता है सुखमय जीवन ही अच्छी नींद प्रदान करता है।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
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