Wednesday, November 18, 2020

बाल कविता

 ' बाल कविता'

           ------------------16.11.2020


देखो देखो नभ कैसा मुस्काया है

इंद्रधनुषी रंगों से खूब सुहाया है।


मन करे ऊंची छलांग उड़ जाऊं

एक रंग पकड़ कर तो ले आऊं। 


काले नीले बादल तो यूं मंडराते

कभी सिकुड़ते कभी फैल जाते।


ढक ले सूरज को अंधेरा कर जाते

हम सब छोटे बच्चे फिर डर जाते


तितली पकड़े शोर खूब मचाते हैं 

एक दूजे के पीछे भागे जाते हैं ।


संध्या हो गई मां चिंता करती होगी

छतपर जाकर नजर दौड़ाती होगी


 सतरंगी नभ मन मे बस गया मेरे

 कितने सुंदर हे इंद्रधनुषी रंग तेरे।


शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

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