देश प्रेम
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17.11.2020
ए मेरे देश की माटी सौगंध तेरी
तेरी रक्षा में समर्पित जान मेरी।
बचपन ममतामयी गोद बिताया
सोंधी सोंधी खुशबू में मैं नहाया ।
खेतखलिहान बैलसंग हल चलाते
अनाज उगाते जीवन निर्वाह पाते।
हे भू मातृ तू जग पालनहारी सदा जीवनमरण का बंधन तुझसे यहां।
सोंचू तेरा कैसे कर्ज मैं चुकाऊंगा
रक्षण करने मैं सीमा पर जाऊंगा।
मैं माटी पुतला माटी ही में पला हूं
पूरा करुं कर्तव्य प्रण पर अड़ा हूं
भाल तिलक मिट्टी को नमन करूं
कुदृष्टि डालें दुश्मन पर घात करूं।
सच्चा प्रेम बलिदान त्याग समर्पण तन मन धन सब कुछ तुझेअर्पण।
देश प्रेम अब दिल में जाग चुका है
जन्मभू बने स्वर्ग मन ठान चुका है
'मेरा भारत देश महान'
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
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