आदतें जिंदगी से बड़ी कभी नहीं हो सकती, क्योंकि "जीवन में आदतें होती है, जीवन आदतों में नहीं होता । "
व्यक्ति के जीवन में आदतें समाहित होती है चाहे वह अच्छी हो या बुरी। अच्छी आदतें जीवन में श्रेष्ठ परिवर्तन लाती हैं ,वहीं बुरी आदतें जीवन को बर्बाद भी कर देती है । अच्छी आदतें जीवन को सरल, सुखमय बनाती हैं जबकि बुरी आदतें कष्टमय बनाती हैं ।
कुछ आदतें सरल होती हैं और कुछ जटिल।
लेकिन जटिल आदतें हमारे जीवन में विशेष प्रभाव डालती हैं। जीवन में जो आदते हमें हानी या कष्ट झेलने पर विवश कर रही हैं उन्हें त्याज्य मानना चाहिए, इन्हें अपनाना श्रेयाकर नहीं होता।
कुछ आदतें जैसे बात बात पर किसी को शर्मिंदा करना ,व्यंग्य करना अर्थात उपहास मजाक उड़ाना, दूसरों को छोटा समझना या हेय दृष्टि से देखना, ईर्ष्या ,घृणा का भाव रखना, ज्यादा बोलना, बात बात पर दूसरों को टोकते रहना, ये ऐसी आदतें हैं जो घर, परिवार, समाज ,मित्रों ,रिश्तेदारों में परस्पर शत्रुता का भाव पैदा करती हैं ।
किसी भी व्यक्ति को इन आदतों को अपने जीवन पर हावी नहीं होने देना चाहिए । स्कारात्मक सोच से युक्त आदतें अच्छी आदतें हैं । समय और कर्म की महत्ता जानना ,आगे बढ़ने की होड़, तरक्की उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होने का जुनून , मानवीय गुण /परोपकार की भावना से युक्त स्वभाव/ प्रवृत्ति जीवन में खुशहाली भरती है। लेकिन ज्यादा अंश में कोई भी आदत जीवन पर ज्यादा प्रभाव डालती है। आदतों के अनुरूप जीवन नहीं चलाया जा सकता जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती है आदतें । दृढ़ता के साथ उनमें परिवर्तन लाया जा सकता है ।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश
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