'करवा चौथ का चांद'
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ऐ चांद तुम जल्दी आना मुझे दर्श दिखाना,
दिनभर की भूखी प्यासी अब देर न लगाना।
ऐ चांद तुम जल्दी आना मुझे दर्श दिखाना।
मेहंदी सजी है हाथ और चूड़ी कंगन है,
सुर्ख लाल साड़ी पांव में छनकती पायल है।
माथे पर टीका सोहे ,बालों में गजरा लगा है ,
नाक में सुंदर नथनी ,आंखों में कजरा लगा है।
थाली सजी है पूजा की हाथ में करवा लिया है,
मांगू मैं वरदान हमेशा साथ सजन जिय का है।
सुखी गृहस्थी ,लंबी आयु व्रत का प्रण लिया है।
सात जन्म का साथ निभाऊं दृढ़ हठ किया है।
ऐ चांद कहीं छुप न जाना जाकर बादलों में तू,
इक चांद है संग मेरे दूजा चांद गगन में तू।
चांद से मांगूं खुशी ,अपने इस चांद के लिए ,
सुहागिन अरमान भरो मनभावन पिया के लिए।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश
🙏
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