Wednesday, November 4, 2020

चाैथ का चांद

 'चौथ का चांद'

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चांद चौथ का मन बड़ा लुभाए आज,

मंदचाल मस्त भाव क्यों ललचाए आज?


ध्यान समाया मन तारों के संग जागी,

उल्लासित, मतवाली  प्रेम प्रीत है लागी।


व्रत संकल्प सौभाग्य हेतु

बन निराहारी,

मोहनी मूुरत पिया की देख

जाऊं बलिहारी।


आज दिवस ,शुभ मंगल शुभता लाया है,

प्रेयसी मैं ,पिया की दुल्हन रूप सजाया है।


मैं कोमलांगी ,सुखी गृहस्थी  तीव्राशी हूं,

हे पावन 'चंद्र' तेरे दर्शन की प्यासी हूं ।


छलनी भीतर तुझे टक टक निहारूंगी,

फिर अपने सजन की नजर उतारूंगी।


मांगूगी वरदान ,मैं बन रहूं सौभाग्यवती,

रहे निरोगी ,स्वस्थ दीर्घायु मेरे पति।


हर साल बाट जोहै नैनन ये 

तोरी,

करजाेड़ मैं प्रार्थी रक्षित रहे हमारी जोड़ी। 


 शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश

🙏

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