गजल
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न कोई हिन्दू न मुसलमान बुरा है नफरत जो फैलाये इन्सान बुरा है
भावना किसी की नहीं हो आहत
न गीता बुरी है न कुरान बुरा है
हर संदेश लिखा है इंसानियत पर
हर शब्द पवित्र हर भाव बड़ा है
भरे हों धन दौलत के भंडार चाहे
धन तो मैल हाथ का ईमान बड़ा है
ज्ञान का बादशाह न जग में कोई
हर एक में समाहित हुनर बड़ा है
रोके न रूके किसी का सफर यहां चाहे राह में जितना रोड़ा अड़ा है।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
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