Friday, October 9, 2020

विचार

 " विचार "

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 जीवन का आधार विचार है ,विचार हमारे मन और मस्तिष्क के संयोजन का परिणाम है  ।मन और मस्तिष्क का यह अनोखा संबंध है जो केवल मनुष्य में ही पाया जाता है  । सोचने के लिए समझने के लिए एक विकसित मस्तिष्क की आवश्यकता होती है ,जो 

 समस्त  जीव धारियों के अपेक्षा  केवल  मनुष्य में ही पाया जाता है  मानव जीवन  विचारों के साथ  आरंभ होता है और विचारों के साथ खत्म होता है कभी शून्य पर आरंभ तो कभी शून्य पर समाप्त । जीवन का आरंभ और अंत दोनों ही विचारों पर निर्भर करता है ।मानव जीवन में विचारों का यह सिलसिला चलता रहता है ।जगती विचारों से ही जिंदा है ।विचार हमारी समझ वह हमारे ज्ञान के परिचायक हैं ।विचार ही है जो व्यक्ति को महान बनाते हैं और महान कार्यों के प्रति रुझान बढ़ाते हैं 

 अच्छे विचार घर परिवार कार्य व्यापार समाज में मनुष्य को प्रगति की ओर ले जाते हैं ।सफलता विचारों पर ही निर्भर करती है  ।विचार परस्पर संबंधों को जोड़ने की कड़ी का काम करते हैं  ।विचार हमारे संबंधों को सींचने वाला अमृत है  ।

विचार परिवर्तनशील होते हैं जो परिस्थिति के अनुरूप परिवर्तित होते रहते हैं ।हर परिस्थिति में विचारों में भिन्नता पाई जाती है स्वीकार्य परिस्थितियों में विचारों में प्रेम, दया ,ममता आदि गुणों का समावेश हो जाता है ।विचार संस्कार बन जाते हैं मनुष्य आदरणीय सम्माननीय बन जाता है ।विचारों ने प्रेम का रूप धारण किया तो कभी इसके विपरीत भी ।व्यक्ति की सफलता एवं असफलता उसके सकारात्मक एवं नकारात्मक विचारों पर निर्भर करती है। उच्च विचार जहां हमारी  प्रगति उन्नति के आधार हैं वही तुछ  विचार व्यक्ति के जीवन पर बुरा प्रभाव डालते हैं ।विचार व्यक्ति के अस्तित्व की पहचान है ।अतः वैचारिक निरंतरता से ही जीवन चलायमान है । व्यक्ति के जीवन में घटित घटनाएं भी विचारों को जन्म देती हैं ।हृदय में उत्पन्न सुख भाव या दुख भाव ही विचारों की प्रतीति है । किसी के द्वारा दिया  कस्ट ,धोखा ,दुख व्यक्ति में  विरोधी विचार ,भाव पैदा करता है वहीं खुशी ,सुख ,अनुकूल परिस्थितियां सकारात्मक विचारों को जन्म देती है। यहां भावों में बंधा हुआ विचारों का ही सिलसिला है विचार स्वभाव है प्रवृत्ति है मानव प्रकृति है समय घटना और परिस्थिति अनुरूप रंग बदलते भावों का नाम ही विचार है विचार जब किसी विशेष वैचारिक प्रवाह की धारा में बहते हैं तो विचारधारा कहलाते हैं सत्संग में बैठा हुआ व्यक्ति भक्तिमय विचारों को आत्मसात करता है ,उसे चारों ओर ईश्वरीय शक्ति के दर्शन होते हैं मानव मात्र में प्रभु का निवास मानता है आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है, इन्हें सात्विक विचार कहते हैं ।सकारात्मक सोच इन विचारों का आधार बन जाता है ।यही विचार व्यक्ति  की  आत्म  प्रगति में  सहायक बनते हैं और जीवन शैली में परिवर्तन लाते हैं।सफल,  योग्य ,महात्मा व उच्च पद पर आसींन व्यक्ति के जीवन परिचय /चरित्र को पढ़कर व्यक्ति के मन में उत्साह ,जोश ,कुछ अच्छा करने ,अच्छा बनने ,प्रगति ,उन्नति का भाव पैदा होता है, ऐसे प्रगतिशील उत्साह पूर्ण विचार व्यक्ति को उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करते हैं ,सफलता के शिखर तक पहुंचाते हैं। ऐसे विचारों से युक्त जीवन शैली औरों के लिए प्रेरणादाई सिद्ध होती है। जीवन की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है की मस्तिष्क में किस प्रकार के भाव उत्पन्न होते हैं । भारतीय संस्कृति में ऋषि-मुनियों ,महात्माओं ,सिद्ध पुरुषों के सुंदर प्रेरणादाई विचारों के दर्शन होते हैं ,जो मनुष्य के सफल जीवन जीने के लिए उपयोगी माने गए हैं । जीवन की परिभाषा उपयोगी ,सहयोगी एवं अर्थपूर्ण विचारों से जुड़ी है अतः व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती हैकि उसके मन मस्तिष्क में किस प्रकार के विचारों का संग्रह है । धन्यवाद ।

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