Monday, October 5, 2020

विचार और भाव

 विचार हमारे मन और मस्तिष्क के संयोजन का परिणाम है । मानव जीवन विचारों के साथ आरंभ होता है और विचारों के साथ खत्म होता है  ।मानव जीवन में विचारों का यह सिलसिला चलता रहता है ।

 विचार हमारे समाज व हमारे ज्ञान के परिचायक हैं । विचार मनुष्य के जीवन में परिवर्तन लाते हैं । विचार भाव में परिवर्तित होकर स्थिरता ग्रहण करते हैं । भाव एक संपूर्ण अंगिक  घटना है जो हमारे पूरे अस्तित्व में अपना प्रभाव दिखाती है । विचार घटना, परिस्थिति, समय के अनुरूप बदल जाते हैं लेकिन भाव तटस्थ बने रहते हैं भाव भावना में बदल जाते हैं।  किसी के प्रति कल्याणकारी भावना दिखाना, किसी के सुख दुख में काम आना ,दुख के समय किसी की सहायता करना ये हमारे परोपकारी भाव है । भगवान के मंदिर में खड़ा हुआ व्यक्ति पूजा अर्चना में व्यस्त , भक्ति भावना से ओतप्रोत हो जाता है , यह भावना  ईश्वरीय  भाव है। थोड़ी देर के लिए हम विचार करते हैं कि यह संसार नश्वर है हम भगवान के प्रति आस्था दिखाते हुए आस्तिक भाव को अपनाते हैं । इन भावों में निरंतरता हमारी भावना बन जाती है ।  विचार ही भावों को जन्म देते हैं । विचार अप्रत्यक्ष भी हो सकते हैं लेकिन भाव हमारे व्यवहार से प्रदर्शित हो जाते हैं  किसी को दुख में देखकर दुखी होना प्रसन्नता के समय खुशियां व्यक्त करना ही भाव है। अतः विचार एक आंशिक घटना है , जो हमारे मस्तिष्क में चलती हैं और भाव एक सर्वांग घटना है , जो हमारे पूरे अस्तित्व से मैं गूंज जाती है ।


 शीला सिंह,

 बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ।

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