Sunday, October 18, 2020

, जय माता दी

 🙏 मां चंद्रघंटा  🙏


-------------------------------


नवशक्ति में रूप तीसरा 

अति   कल्याणकारी  । 

दिव्या   सुगंधि    पूर्ण 

सिंह    की    सवारी।  ।


मस्तक   पर   अर्धचंद्र 

चंद्रघंटा     कहलाती  ।

कनक सम  तन रंगत

है चमक   मन  भाती ।


दशम   हस्त    खडग

अस्त्र शस्त्र   सजे   हैं   ।

ध्वनि  भयानक  करती 

दानव  दैत्य  कांपे   हैं  ।


 भक्ति  कर   साधक

 निर्भय वीर  बने  है   । 

ज्ञान सौम्या विनम्रता 

की  ज्योत  जगे  हैं  ।


 हे  कष्टहारिणी   मैं  

शरणागत  कृपा करो ।

शुचि विग्रह ध्यान करूं

 ऐसा   वरदान   दो    ।


लोक परलोक  सद्गति

 दो  मुझे   हे   देवी    ।

मन क्रम वचन करूं 

आराधना मैं हे देवी। ।



 शीला सिंह 

बिलासपुर ।

हि. प्र. ।

No comments:

Post a Comment

मैं पढ़ने जाऊ़ंगी

 'बाल कविता'  ------------------ मां मैं भी पढ़ने पाठशाला जाऊंगी ज्ञान पा मैं पढ़ी-लिखी कहलाउंगी घर का सारा काम भी  मैं  करूंगी अच्छ...