🙏 मां चंद्रघंटा 🙏
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नवशक्ति में रूप तीसरा
अति कल्याणकारी ।
दिव्या सुगंधि पूर्ण
सिंह की सवारी। ।
मस्तक पर अर्धचंद्र
चंद्रघंटा कहलाती ।
कनक सम तन रंगत
है चमक मन भाती ।
दशम हस्त खडग
अस्त्र शस्त्र सजे हैं ।
ध्वनि भयानक करती
दानव दैत्य कांपे हैं ।
भक्ति कर साधक
निर्भय वीर बने है ।
ज्ञान सौम्या विनम्रता
की ज्योत जगे हैं ।
हे कष्टहारिणी मैं
शरणागत कृपा करो ।
शुचि विग्रह ध्यान करूं
ऐसा वरदान दो ।
लोक परलोक सद्गति
दो मुझे हे देवी ।
मन क्रम वचन करूं
आराधना मैं हे देवी। ।
शीला सिंह
बिलासपुर ।
हि. प्र. ।
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