Saturday, October 17, 2020

जय माता दी

 🙏जय माता दी🙏


नवशक्ति में दूसरा रूप  मां बड़ा ही प्रतापी है ।

जो तप, वैराग्य ,सदाचार, संयम और त्यागी है ।


धैर्य ,तप की चारिणी, तू ब्रह्मा चरिणी है  ।

पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य भाविनी है ।


नारद के उपदेश से शंकर को पति रूप माना ।

कठिन तप सहस्त्र  वर्षों ,अपर्णा नाम जाना ।


विलव पत्र सेवनी केवल आराधना शंकर माना ।

तू  ही  निर्जला और   निराहरिणी जग ने माना ।


देव जन ऋषि मुनि सराहना तेरी करते हैं ।

चंद्रमौली   शिव  मिले  तुम्हें  ये वरदान देते हैं ।


तुम्हारी पूजा से सर्व सिद्धि सब जन पाते हैं ।

जीवन है कठिन तप कथा का सार बताते हैं। 


 शीला सिंह 

बिलासपुर

(हि. प्र.)

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