🙏जय माता दी🙏
नवशक्ति में दूसरा रूप मां बड़ा ही प्रतापी है ।
जो तप, वैराग्य ,सदाचार, संयम और त्यागी है ।
धैर्य ,तप की चारिणी, तू ब्रह्मा चरिणी है ।
पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य भाविनी है ।
नारद के उपदेश से शंकर को पति रूप माना ।
कठिन तप सहस्त्र वर्षों ,अपर्णा नाम जाना ।
विलव पत्र सेवनी केवल आराधना शंकर माना ।
तू ही निर्जला और निराहरिणी जग ने माना ।
देव जन ऋषि मुनि सराहना तेरी करते हैं ।
चंद्रमौली शिव मिले तुम्हें ये वरदान देते हैं ।
तुम्हारी पूजा से सर्व सिद्धि सब जन पाते हैं ।
जीवन है कठिन तप कथा का सार बताते हैं।
शीला सिंह
बिलासपुर
(हि. प्र.)
No comments:
Post a Comment