Tuesday, October 13, 2020

अमूल्य मानव जीवन

 मानव जीवन अमूल्य है। यह ईश्वर का दिया हुआ अनमोल तोहफा है  ।


।जीवन को सामर्थ्यवान बनाकर इसकी पूर्णता को ग्रहण किया जा सकता है । मनुष्य सदैव योग्य और सफल जीवन की कामना करता है । इसके लिए वह श्रेष्ठ कर्म और परिश्रम को महत्व देता है । जीवन को प्रगति के पथ पर गतिमान बनाए रखने के लिए  योग्यता  ,कर्मठता ,मेहनत जैसे गुणों का होना अति आवश्यक है। 


 जीवन में निरंतर आगे बढ़ने की लालसा , और सब कुछ पाने की इच्छा  मनुष्य में गतिशीलता का प्रवाह बनाए रखती है । जीवन में सफलता का प्रवाह अथवा बहाव झरने के स्रोत की भांति  उत्तरोत्तर उन्नति का परिचायक तो है ही मगर कुछ मानवीय मूल्यों से अलग  ।

 मनुष्य का मानसिक चिंतन केवल आत्म उन्नति और सफलता तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए उसे मानवीय परिवेश  से परिचित होना भी आवश्यक है ।

 मनुष्य सफल  जीवन की सदैव कल्पना करता है उसका हमेशा पक्षधर रहता है । मगर तरक्की के प्रवाह में इतना बह जाता है कि सभी मानव मूल्यों की उपेक्षा करता जाता है ।

  किसी हद तक जीवन का बहाव झरने जैसा होना चाहिए क्योंकि सागर तक पहुंचने के लिए यह प्रवाह अति आवश्यक है । परंतु वहां तक पहुंचते-पहुंचते  झरना अपनी पहचान और अपना अस्तित्व ही खत्म कर देता है । उसकी अलग से कोई पहचान नहीं रहती । वह विशाल समुद्र में अपने आप को समर्पित कर देता है , या यूं कहें कि वह अपनी गतिशीलता को विराम दे देता है  ।


  मानव जीवन में तरक्की का बहाव, आगे बढ़ने की होड़  कोई बुरी बात नहीं है मगर मानवीय मूल्यों का तिरस्कार  नहीं होना चाहिए। जीवन में विकास जरूरी है मगर उस की नींव  विनाश के पत्थर पर नहीं टिकी होनी चाहिए । जीवन में गतिशीलता जरूरी है मगर संवेदनहीनता नहीं होनी चाहिए । जीवन में आत्म विकास ,आत्माेत्थान सर्वोपरि है मगर मानव  विरोधी नहीं होना चाहिए, राष्ट्र  विरोधी नहीं होना चाहिये ।


 शीला  सिंह

 बिलासपुर ,हिमाचल प्रदेश।

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