Monday, October 12, 2020

प्रार्थना में शक्ति

 जी हां प्रार्थना मन की पुकार है जो भावपूर्ण हृदय से निकलती है, इसका व्यक्ति के  अवचेतन मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। किसी भी व्यक्ति/ भक्त का व्याकुल मन विनीत भाव में जब प्रभु के प्रति करुण पुकार करता है तो वह प्रार्थना अवश्य सफल होती है। प्रार्थना विश्वास का विधान है ।एक प्रेरक शक्ति है जो हमें विपरीत /कठिन /संकटमय परिस्थितियों से सामना करने की हिम्मत देती है। प्रार्थना से बड़ी सहायक शक्ति दूसरी नहीं है ।स्वास्थ्य को लेकर जब हम हताश हो जाते हैं तो उस परमपिता परमेश्वर के समक्ष विनय /प्रार्थना करते हैं जो सर्व व्यापक है, सर्वशक्तिमान है ,हम उसकी उपस्थिति अपने आसपास ही समझते हैं और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं। संकट में घिर जाने पर भी हम उसी अज्ञात सत्ता का स्मरण करते हुए प्रार्थना करते हैं। सृष्टि के रचयिता जिस प्रभु द्वारा पूरी सृष्टि सजीव है, चलायमान है ,उसी असीम व अनंत सत्ता के प्रति जब हमारा मस्तक श्रद्धा भाव से झुक जाता है ,वह प्रार्थना है। प्रार्थना ही हमें आंतरिक शक्ति प्रदान करती है। सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना अवश्य चमत्कारिक होती है ।वह सीधी परमात्मा तक पहुंचती है ।अतः अपने जीवन काल में मेरा यह अनुभव रहा है जब हम सारी आशा छोड़कर, हताश हो कर, निढाल हो कर, बैठ जाते हैं उस समय प्रभु के समक्ष जब   हृदय  की पुकार उठती है तो हमें कहीं न कहीं से अवश्य कोई सहारा या मदद मिल जाती है । अतः प्रार्थना सांसारिक और असांसारिक समस्याओं का समाधान है क्योंकि इसकी पुकार ह्रदय के माध्यम से होती है।


शीला सिंह

 बिलासपुर हिमाचल प्रदेश।🙏

2 comments:

मैं पढ़ने जाऊ़ंगी

 'बाल कविता'  ------------------ मां मैं भी पढ़ने पाठशाला जाऊंगी ज्ञान पा मैं पढ़ी-लिखी कहलाउंगी घर का सारा काम भी  मैं  करूंगी अच्छ...