Wednesday, January 6, 2021

सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले


    सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका समाज सुधारिका, स्त्रियों ,बालिकाओं के अधिकारों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली, इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली ,मराठी कवयित्री को उनकी जयंती पर उन्हें शत शत नमन करती हूं । 

 उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है । उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को नायगांव (पुणे) हुआ था। इनके पिता का नाम खंदोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सन 1840 में उनका विवाह ज्योतिराव गोबिन्दराव फुले जी से हो गया ,जिन्होंने इनके उच्च विचारों का मान रखा और हर कदम इनका साथ दिया। 

सावित्रीबाई को उनके पति का भरपूर सहयोग मिला और इन्होंने सन 1848से

1852 ई. में बालिकाओं के लिए विद्यालयों की स्थापना का पुण्य काम शुरू करने का प्रयास किया । सन 1852 ई.  में  सभी जातियों /श्रेणियों की बालिकाओं /स्त्रियों के लिए किसान विद्यालय की स्थापना की ।सावित्रीबाई इस पहले किसान स्कूल की संस्थापक और प्रिंसिपल बनी । 

यहीं से सावित्री बाई के जीवन को एक मिशन की तरह जीने का उद्देश्य मिल गया। पति के सहयोग से उन्होंने अनेकों सामाजिक बुराइयों को दूर करने का संकल्प रखा। विधवा विवाह करवाना ,छुआछूत मिटाना ,दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना, रूढ़ि परंपराओं से महिलाओं को मुक्ति दिलाना  मुख्य  लक्ष्य रहा । उन्होंने उस समय की तुच्छ ग्रामीण मानसिकता तथा परिस्थितियों का डटकर सामना किया । उस समय स्त्रियों /दलितों /दलित महिलाओं की   दशा अति दयनीय थी ।

 इतनी विकृत सामाजिक व्यवस्था में बालिकाओं के लिए स्कूल खोलना तो पाप के बराबर था । ऐसे समय में सावित्रीबाई जी ने कितनी हिम्मत का काम किया , जिसकी जितनी सराहंना की जाए कम है। 

सावित्रीबाई पूरे देश के लिए किसी महानायिका से कम नहीं है। बालिकाओं के लिए  उस समय स्कूल चलाना  कितना मुश्किल रहा होगा इसकी कल्पना  शायद आज भी नहीं की जा सकती है। उस समय लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी थी ।जब वह स्कूल जाती थी तो गांव के विरोधी लोग उसे गालियां देते, पत्थर फेंकते ,गोबर फेंकते, लेकिन उन्होंने अपने अदम्य साहस का परिचय दिया,और अपने मिशन को जारी रखा। अपने थैले में एक अलग पोशाक डाल कर ले जाती थी, ताकि लोगों द्वारा फेंके गए कीचड़ वाले कपड़ों को बदल सके। उनके पति महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। तत्कालीन सरकार ने इन्हें सम्मानित भी किया ।समाज को बदलने ,सुधारने में इस  जुझारू, दृढ़संकल्पी ,आदर्शवादी दंपत्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है । समाज में एक नई सोच पैदा करने में इन महान विभूतियों का अमूल्य योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकेगा ,सदैव स्मरण किया जाएगा🙏🙏


शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏

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