लोग कहते प्यार की निशानी है ताजमहल,
मैं कहती बेगुनाहों की कुर्बानी है ताजमहल।
ताजमहल की खूबसूरती वो आंसू अब भी टपक रहे,
जिनके असंख्य किस्से इसके गर्भ में सिसक रहे।
वर्षों वर्षों की मेहनत हर नक्काशी में खिली है,
सफेद संगमरमरी पत्थरों में श्रम की बूंदें मिली है।
खून पसीना बहा कर जिन्होंने ये ताजमहल बनाया,
बड़ी शिद्त से अपने हुनर का वो परचम लहराया।
कहाँ मालूम हाथ का हुनर क्या उपहार लेकर आयेगा
खूबसूरत*ताज*निर्दयी प्यार की बलि चढ़ जायेगा ।
नहीं भुला पाया वक्त उन गहरी चीखों, चित्कारों को,
ठूंठ बना कर रख दिया, कुशल कामगारों को।
अपने शिल्पी ज्ञान पर था गर्व और गरूर जिनको,
वो वरदान नहीं अभिशाप बन निगल गया जिनको।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏
No comments:
Post a Comment