नमन करुं उस सत्ता को
जिसका हृदय दर्पण है,
जगती भावों की ज्योति
श्रद्धा सुमन अर्पण है।
पल पल का व्याख्यान
संजोए अपने पास है ,
अच्छे बुरे कर्म का संग्रह
पाई पाई का हिसाब है।
नमन करूं उस सत्ता को
जिसका हृदय दर्पण है,
जगती भावों की ज्योति
श्रद्धा सुमन अर्पण है।
आदि न अंत सृष्टि बेअन्त
उसकी माया अपरंपार है,
आवत- जावत धरा गृह सम
लाख चौरासी योनि जन्म है।
नमन करूं उस सत्ता को
जिसका हृदय दर्पण है,
जगती भावों की ज्योति
श्रद्धा सुमन अर्पण है ।
अक्षय विशाल नभमण्डल
रवि शशि नक्षत्र संसार है,
नश्वर मानव जगत केवल
बालू कण मिथ्य सार है।
नमन करूं उस सत्ता को
जिसका हृदय दर्पण है ।
जगती भागों की ज्योति
श्रद्धा सुमन अर्पण है ।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏
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