Wednesday, January 6, 2021

अज्ञात सत्ता

 

          


 नमन करुं  उस सत्ता को

 जिसका  हृदय  दर्पण  है,

जगती  भावों  की ज्योति

 श्रद्धा   सुमन  अर्पण  है।



पल  पल का  व्याख्यान 

संजोए अपने  पास  है ,

अच्छे बुरे कर्म का संग्रह 

पाई पाई का हिसाब है।

नमन करूं उस सत्ता को

जिसका हृदय दर्पण है,

जगती भावों की ज्योति

श्रद्धा  सुमन  अर्पण है।



 आदि न अंत सृष्टि  बेअन्त

उसकी माया अपरंपार  है,

आवत- जावत धरा गृह सम

लाख चौरासी योनि जन्म है।

नमन  करूं  उस सत्ता  को

 जिसका  हृदय   दर्पण  है,

जगती  भावों   की  ज्योति

 श्रद्धा   सुमन  अर्पण   है ।



अक्षय  विशाल नभमण्डल 

रवि  शशि नक्षत्र संसार  है,

नश्वर  मानव जगत  केवल 

बालू  कण  मिथ्य सार  है।

नमन  करूं उस  सत्ता को 

जिसका  हृदय  दर्पण  है ।

जगती  भागों  की ज्योति

 श्रद्धा  सुमन  अर्पण  है ।


शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏

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