Monday, December 7, 2020

गजल


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रात भर जागी वो शम्मा साथ थी पिय की याद में रोई वो आंख थी


धीरे से कानों में सुनी आवाज थी

पर वो तो हवायें श्रृंगारी साज थी


 तारों सजी महफिल आबाद थी खामोशी का आलम या लाज थी


शव-ए-ग़म दर्द मिला पर नाज़ थी 

अश्कडूबी आंखें वो लाजवाब थी 


हिम्मत निराशमन की वो आस थी

शमा'शील' के लिए कुछ पल खास थी।

 

शीला सिंह

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

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