'कविता'
--- कर्म---
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कर्म ही मानव जीवन
औरजीवन का आधार
कर्म से उसकी सीरत
कर्म से उसकी पहचान
कर्म ही से पाए संतुष्टि
और खुशियां अपरंपार
कर्म से ही उन्नति प्रगति
और दिलाए स्वच्छ प्रवृत्ति
अच्छे कर्म ही है सत्कर्म
जीव कला पाये निखार
कर्म ही शान आन बान
कर्म से ही मान सम्मान
कर्म जीवन की है रीत
कर्म निभाये प्रेम प्रीत
कर्म त्यागे सो दुःख पावें
सार्थक जीवन नहीं पावें
कर्म बिगड़े काज बनाए
घर बाहर वो इज्जत पाये
कर्म जीवन में उपयोगी
न समझे आलसी भोगी।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
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