-----गजल-----
'जिंदगी '
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जिंदगी रोज इक इम्तिहान होती है,
कभी खुशी तो कभी गम देती है ।
चाह मन नभ में विचरण करने को,
उन्मुक्त परिंदों के पर काट देती है।
कभी छीन लेती है चेहरे से लालिमा,
कभी खूबसूरत रंगों से भर देती है ।
कभी काले खयालों में ही छुपा देती है,
कभी झढ़ी खुशियों की भी लगा देती है ।
डूबा देती है बन आफत मंझधार में,
सहेज कर किनारे भी लगा देती है ।
सजदा करती अश्रु धारा वो बहाती है,
चुपके से मन आशा से भर जाती है ।
गुम हो जाती घने अंधेरे में कभी,
फिर झटसे उजाला भी भर जाती है।
जिंदगी भेद अबतक समझ न पाई,
कभी हंसाई तूने और कभी रुलाई।
शीला सिंह
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏
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