Wednesday, November 18, 2020

गजल - 'जिंदगी'

 -----गजल-----


     'जिंदगी '

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जिंदगी रोज इक इम्तिहान होती है,

कभी खुशी तो कभी गम देती है ।


चाह मन नभ में विचरण  करने को,

उन्मुक्त परिंदों के पर काट देती है।


कभी छीन लेती है चेहरे से लालिमा,

कभी खूबसूरत रंगों से भर देती है ।


कभी काले खयालों में ही छुपा देती है, 

कभी झढ़ी खुशियों की भी लगा देती है ।


डूबा देती है बन आफत मंझधार में,

सहेज कर किनारे भी लगा देती है ।


सजदा करती अश्रु धारा वो     बहाती है,

चुपके से मन आशा से भर जाती है ।


गुम हो जाती घने अंधेरे में कभी,

फिर झटसे उजाला भी भर      जाती है।


जिंदगी भेद अबतक समझ       न पाई,

कभी हंसाई तूने और कभी रुलाई।



 शीला सिंह

 बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

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