Saturday, October 24, 2020

भराेसे के बल कर्म का सरोकार

 क्या भरोसे के बल पर कर्म सरोकार होता है? इस विषय पर भिन्न-भिन्न अर्थ और विचारों के आधार पर इसे परिभाषित किया जा सकता है  ।सर्वप्रथम भरोसा  अर्थात विश्वास जो व्यक्ति, घटना, समय, स्थिति, परिस्थिति और वातावरण के अनुसार अपनी भूमिका एवं महत्त्व दर्शाता है ।

 भरोसा मन की ताकत है। जब हम किसी सच्चे इंसान पर भरोसा करते हैं तो अपने कर्म भी सहज/आसान कर लेते हैं  । मुश्किलों /समस्याओं पर काबू पा लेते हैं और अपने काम अथवा कर्म को पूर्णता प्रदान करते हैं ।


 भरोसे के बल पर मनुष्य कठिन से कठिन काम भी आसानी से कर लेता है । किसी काम के प्रति लगन, उत्साह, उत्तेजना, मजबूती , हिम्मत , हृदय में बसे भरोसे की ही उपज होते हैं   ।भरोसा व्यक्ति को कर्मठ बनाता है, आशावान और महत्वाकांक्षी बनाता है।


 परिवार में माता-पिता अपनी संतान के हृदय में भरोसे का भाव भरते हैं परिणामस्वरूप संतान मेहनत के बल पर सफलता के मार्ग पर अग्रसर होती है । भरोसा केवल अच्छे कार्यों को लेकर होना चाहिए । श्रेष्ठ गुणों से युक्त मां-बाप का भरोसा संतान को जीने की राह दिखाता है । मुसीबत या संकट के समय आत्मरक्षा करना सिखाता है  ।कर्म के प्रति कर्तव्यवान बनाता है । कर्म यदि जीवन का आधार है तो भरोसा उसे पुष्ट करता है । 


मानव जीवन में कर्म की पूर्णता या सार्थकता मुख्य रूप सेअपने आप के भरोसे पर टिकी है । स्वयं पर भरोसा सर्वश्रेष्ठ है  क्योंकि आत्मविश्वास ही जीवन को सफल बनाता है। कहा भी गया है --'मन के हारे हार ,मन के जीते जीत।' अपने आप से भरोसे अथवा विश्वास को खो देना अकर्मण्यता  सिद्ध करता है । आलस्य और अनिश्चितता भरोसे और विश्वास के शत्रु है  जो  मनुष्य को कर्म हीन और अकर्मण्य बनाते हैं ।  कर्म की सार्थकता भरोसे और विश्वास पर ही टिकी है । एक योग्य शिक्षक  आत्मविश्वास के आधार पर ही ज्ञान अर्जन करके ही शिक्षक धर्म निभाता हैं । क्योंकि शिक्षण कर्म से उसका सरोकार है । उसका कर्तव्य है  अतः उसके ज्ञान की नींव भरोसे पर ही टिकी है जो उसके हृदय में विद्यमान है । यदि वह अपने कर्म के प्रति अनिश्चितता ,अनभिज्ञता दिखाता  तो  शिक्षण कर्म पूर्ण नहीं हो पाता ।


 इसीलिए किसी भी कर्म की डोर हृदय में स्थित भरोसे से बंधी है । अकर्मण्यता, निराशा, हताशा, आलस्य , अनिश्चितता उस भरोसे रूपी डोर को कमजोर करते हैं । यह भी माना  गया है कि भरोसे पर ही दुनिया के काम टिके है  लेकिन उसमें जरूरत है तो केवल सबलता की कर्मठता , क्रियाशीलता और सक्रियता की। 


 शीला सिंह 

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश🙏

1 comment:

  1. Very wonderful analysis of trust which is foundation of all relations and successes. Dr Anek SANKHYAN

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