Monday, May 31, 2021

दोहे। सृजन शब्द --प्रश्न

 


1.

कैसी आँधी छा रही, धिरती संकट जान। 

प्रश्न मनमें कौंध रहे, चाहते समाधान।।

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2.


जीवन बनता प्रश्न है, प्राण गये है हार। 

हरपल तेरी ओट है, जग के पालनहार।।

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3.

कलयुग का यह प्रश्न है, बढ़ता पापाचार। 

गोरख धंधा फैलता,पनप रहा व्यापार।।

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4.

मानुष जंगल काटता, मिटता जग श्रृंगार। 

प्रकृतिहि करती प्रश्न है, भटके जीवन तार।। 

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5.

उलझा सबकुछ आज है, उपजे पलपल प्रश्न। 

साँसे उखड़ी जा रही, मौन होते जश्न।। 

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शीला सिंह बिलासपुर हिमाचल प्रदेश 🙏

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